मुम्बई

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मुम्बई (पूर्व नाम बम्बई अथवा बॉम्बे), भारत के पश्चिमी तट पर स्थित एक महानगर और भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या ३ करोड़ २९ लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों पर मानव बसाव द्वारा हुआ है और इसके ये द्वीपीय हिस्से पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़े हुये हैं। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आने वाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है।

क्षेत्र[सम्पादन]

मुम्बई के क्षेत्र का रंगीन नक्शा
दक्षिण मुम्बई (किला, कुलाबा, मालाबार हिल, नरीमन प्वाइंट, समुद्री लाइन्स, तार्डो)
यह मुंबई का बहुत पुराना इलाका है। इसे भारत के वाणिज्य राजधानी का दिल कहा जाता है। देश के सबसे अमीर लोग यहाँ रहते हैं, जो दुनिया के सबसे अधिक संपत्ति वालों में गिने जाते हैं। दक्षिण मुम्बई में रियल एस्टेट की कीमत मैनहेट्टन वाले के लगभग बराबर रहता है। यह मुम्बई में आने वाले पर्यटकों का मुख्य स्थान है और यहाँ कई सारे संग्रहालयों, बार, भोजनालयों, आदि हैं।
दक्षिण मध्य मुम्बई (बायकुला, परेल, वरली, प्रभादेवी, दादर)
पहले इसे मुम्बई के उद्योगों द्वारा बहुत उपयोग किया जाता था, लेकिन बाद में कई उद्योग वालों ने इसके लिए दूसरे जगहों को चुन लिया। उसके बाद इस जगह का फिर से नए रूप में विकास हुआ और आज कल यहाँ केवल लोगों के कार्यालय ही हैं।
उत्तर मध्य मुम्बई (धारावी, माटुंगा, वाडाला, सायन, माहिम)
धारावी को छोड़ दें तो मध्यम वर्ग से थोड़े ऊपर के लोग यहाँ सबसे अधिक रहते हैं। ये एशिया का दूसरा सबसे बड़ा झोपड़ी वाला क्षेत्र है। भारत के आजादी के तुरंत बाद ही लोगों ने यहाँ बसना शुरू कर दिया था। जिसके कारण इस जगह पर उस समय तेजी से झोपड़ी वाला क्षेत्र बन गया।
पश्चिम मुम्बई (बांद्रा, खर, सैंटा क्रूज, विल पार्ले, अंधेरी, वेर्सोवा)
मुम्बई का दूसरा ऐसा जगह है, जहाँ आपको झोपड़ी नजर आएगी और इसके साथ साथ कई अमीर लोग भी यहाँ शांति की तलाश में आ जाते हैं। इसमें कुछ नदी के किनारे का भाग भी है, जिसमें आप खेल कूद भी कर सकते हैं। इसमें बहुत बड़ी संख्या में ईसाई रहते हैं और कई सारे चर्च भी हैं। इसमें कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे भी मौजूद हैं।
पूर्व मुम्बई
उत्तर मुम्बई (मनोरी, जोगेश्वरी, बोरीवली, गोराई, दहिसर)
ये एक ऐसा जगह है, जहाँ आपको समुद्री किनारे में कोई गंदगी नहीं दिखेगी। बस इसी को छोड़ कर बाकी सभी इलाका पूरी तरह से मुम्बई के शहरीकरण का शिकार ही है। पर इसमें इसके अलावा देखने लायक जगहों में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान और मुम्बई के कुछ सबसे पुराने विरासत भी शामिल है। जिसमें कन्हेरी, महाकाली, जोगेश्वरी और मंडपेश्वर मन्दिर है, जो यहाँ पहली सदी से पाँचवी सदी के बीच बने हो सकते हैं। गोराई मुम्बई में एक ग्लोबल विपस्सना पगोडा नाम से एक मशहूर स्मारक भी है, जिसका उदघाटन भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने 8 फरवरी 2009 को किया था।

परिचय[सम्पादन]

इतिहास[सम्पादन]

यह क्षेत्र 1498 तक गुजरात के सुल्तान के पास ही था, लेकिन इसके बाद पुर्तगालियों हमला कर इस जगह पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उन लोगों ने रहने का स्थान, किला, चर्च आदि का निर्माण शुरू कर दिया। इस तरह का कार्य तब रुका जब इस जगह को इंग्लैंड ने अपने हिस्से में ले लिया। 1661 में कैथरिन डे ब्रैगंजा के कारण पुर्तगालियों ने इसे इंग्लैंड के हवाले कर दिया। लेकिन इंग्लैंड का चार्लस द्वितीय इस क्षेत्र में कोई रुचि नहीं ले रहा था और 1668 में इसने ईस्ट इंडिया कंपनी को £10 प्रति वर्ष में इसे किराये पर दे दिया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहाँ बन्दरगाह का निर्माण कराया और इसे व्यापार करने के लायक जगह में बदल दिया। उनका कार्य भारत के आजाद होने से पूर्व तक चलता ही रहा।

हिन्दी फिल्म उद्योग[सम्पादन]

गेटवे ऑफ़ इंडिया, मुम्बई का ऐतिहासिक स्थान

हिन्दी फिल्म उद्योग, जिसे बॉलीवुड कहते हैं, का विकास भी मुंबई में ही हुआ है। बॉलीवुड शब्द का निर्माण अमेरिका के हॉलीवुड और मुंबई के पुराने नाम बम्बई से मिल कर हुआ है। मुंबई मुख्य रूप से हिन्दी सिनेमा के कारण जाना जाता है। यह उद्योग बहुत ही बड़ा है और लगभग पूरी दुनिया में फैला हुआ है। यहाँ सभी हिन्दी फिल्मों के कलाकार रहते हैं।

मौसम[सम्पादन]

मुंबई महासागर के किनारे ही बसा हुआ है। इस कारण कई बार यहाँ चक्रवात भी आते रहते हैं। चक्रवात के समय कई बार ज्वार-भाटा भी समस्या उत्पन्न करता है। इसके कई स्थान नीचे होने के कारण यहाँ पानी भरने की समस्या भी कुछ स्थानों में रहती है। इसके अलावा यहाँ का मौसम काफी अच्छा रहता है।

घूमना[सम्पादन]

यहाँ घूमने के लिए बहुत सी जगहें हैं। यहाँ रात में भी दिन के जैसे ही चहल-पहल होती है और कोई भी रात को भी यहाँ आराम से घूम सकता है। यह बहुत ही व्यस्त शहर है। इस कारण यहाँ यातायात एक समस्या है। फिर भी यहाँ आसानी से घूमा जा सकता है। इसके लिए कई टेक्सी भी उपलब्ध होती है।

"भारत का प्रवेशद्वार" (गेटवे ऑफ इंडिया) भी एक बहुत ही प्रसिद्ध स्मारक है, जहाँ आप घूम सकते हैं। यह बहुत पहले बनाया गया था और इसे घूमने हेतु रखा गया है। यहाँ घूमने और इसे देखने के लिए कई देशी और विदेशी लोग भी आते रहते हैं।