कोलकाता

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कोलकाता (बंगाली: কোলকাতা) जिसे पूर्व में कलकत्ता कहा जाता था, पश्चिम बंगाल की राजधानी है और भारत के सबसे बड़े शहरी ढाँचे में से एक है। इसे खुशियों का शहर भी बोला जाता है। यह पूर्वी भारत का सबसे बड़ा शहर है। यदि आपको भारत के केवल एक या दो महानगरों में यात्रा करने की अनुमति है या आप केवल एक या दो ही नगरों में घूमना चाहते हैं तो आप अपने यात्रा के कार्यक्रम में कोलकाता को जोड़ने पर निश्चित रूप से विचार करें। यह भारत के सबसे अधिक सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रगतिशीलता वाले शहरों में से एक है।

अन्य जानकारी[सम्पादन]

इतिहास[सम्पादन]

अंग्रेजी राज की याद दिलाता विक्टोरिया मेमोरियल

कोलकाता का इतिहास काफी हद तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और ब्रिटिश इंडिया से जुड़ा हुआ है। यहाँ यह कंपनी वर्ष 1690 में आई थी और इसे अंग्रेजों ने 1772 में अपनी राजधानी बना दिया था। इस कारण जॉब चार्नोक नामक अंग्रेज को इसका संस्थापक माना जाता है। उस समय कलकत्ता को तीन गाँवों से मिला कर बनाया गया था, जिसमें सुतनुती, गोबिंदोपुर और कालिकता था। बाद में कालिकता का नाम कोलकाता हो गया। लेकिन कई इतिहासकारों के अनुसार कोलकाता का निर्माण प्राकृतिक रूप से धीरे धीरे हुआ था।

आधुनिक कोलकाता[सम्पादन]

आधुनिक कोलकाता व्यापार, वाणिज्य और आर्थिक विकास का केन्द्र बन चुका है। इसके व्यापार के कारण कई जगह के लोग यहाँ आने लगे थे जैसे जर्मन, अर्मेनी, चीनी, सिंहली और तिब्बती। इन सब के आने से इनकी संस्कृति सभ्यता का भी प्रभाव पड़ा और कई तरह के भोजन भी इसमें शामिल है। आप यहाँ कई अन्य देशों के भोजन भी कर सकते हैं। कोलकाता को भारत का बहुत बड़ा चीनी शहर के रूप में भी जाना जाता है। कई चीनी निवासी कई पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं।

अर्थव्यवस्था[सम्पादन]

मौसम[सम्पादन]

कोलकाता में तीन मुख्य ऋतुयें होती हैं। ये ग्रीष्म, वर्षा और शरद ऋतु हैं। मार्च से मई तक का मौसम गर्मी वाला रहता है। जिसमें गर्मी के साथ उमस भी होती है और तापमान 38-42° से॰ के आसपास हो जाता है। ग्रीष्म ऋतु के बाद वर्षा ऋतु आती है। इस दौरान मानसून के कारण वर्षा होती है, जो जून से शुरू होती है और सितम्बर के अंत तक या अक्टूबर के शुरुआत में समाप्त होती है। इस दौरान बहुत वर्षा होती है और कई बार इससे कुछ क्षेत्रों में वर्षा का पानी रुक जाता है और आने-जाने में परेशानी होती है। शरद ऋतु की शुरुआत वर्षा के जाने के बाद ही होनी शुरू हो जाती है पर इसका असर नवम्बर से पता चलता है। यह नवम्बर से फरवरी तक रहती है। इस दौरान शहर का तापमान 8 से 20° से॰ तक गिर जाता है। नवम्बर और फरवरी के आसपास में मौसम खुला भी रहता है और न तो अधिक गर्मी रहती है और न ही अधिक ठंड होती है। अतः इन दोनों महीने के आसपास जाना सबसे अच्छा रहता है।

भाषा[सम्पादन]

यहाँ के लोगों की मातृ भाषा बंगाली है। फिर भी यहाँ के लोग हिन्दी समझ लेते हैं और कई लोग बोल भी लेते हैं। यदि आप हिन्दी जानते हैं तो आप काफी हद तक बंगाली भी समझ लेंगे। काम चलाऊ अंग्रेजी भी कई लोग समझ और बोल सकते हैं। खास कर टैक्सी चालक या मार्गदर्शक आपसे इन भाषाओं में या कुछ लोग अन्य भारतीय भाषाओं में भी बात कर सकते हैं। यदि आप यहाँ आराम से अपनी छुट्टी बिताना चाहते हैं या रहना और घूमना चाहते हैं तो आपको बंगाली भाषा सीख ही लेनी चाहिए। हिन्दी भाषा के कई शब्द बंगाली भाषा में भी प्रयोग होते हैं और व्याकरण का रूप भी वैसा ही है, बस आपको शब्दों और वाक्यों के लिए थोड़ी मेहनत बस करनी है।

यात्रा[सम्पादन]

विमान द्वारा[सम्पादन]

  • नेताजी सुभास चन्द्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा - इसे डम दम हवाई अड्डा भी बोलते हैं। यह शहर के मध्य से 18 किलोमीटर दूरी पर है। यहाँ पहुँचने के लिए आप टैक्सी का उपयोग कर सकते हैं, जिसके लिए आपको ₹150-₹250 के आसपास रुपये देने होंगे। एक नई रेल मार्ग भी इस हवाई अड्डे तक ले जा सकती है। लेकिन कुछ ही रेल इस मार्ग से आना जाना करती है। आप शहर के मध्य से वोल्वो बस सेवा ले सकते हैं, जिसके लिए आपको ₹20, ₹40 या ₹60 रुपये देने होंगे। यह बस पाँच अलग अलग मार्गों से आना जाना करती है, यदि आपको नहीं पता कि यह किस मार्ग से होते हुए जाएगी तो आप बस चालक से पूछ सकते हैं।

रेल द्वारा[सम्पादन]

कोलकाता अच्छी तरह से भारत के सभी बड़े स्टेशनों से जुड़ा हुआ है। यह इसके अलावा आपको पूर्वोत्तर भारत के हिस्से में भी जाने की सुविधा देता है। इसके अलावा मैत्री एक्सप्रेस नाम से एक अंतर्राष्ट्रीय रेल सुविधा भी है, जिससे कोलकाता से ढाका, बांग्लादेश में जा सकते हो। यह सप्ताह में तीन दिन चलती है। इस रेल के साथ-साथ अन्य सभी रेल के आने जाने के समय और अन्य जानकारी के लिए आपको भारतीय रेल की आधिकारिक वेबसाइट देखना होगा।

  • हावड़ा रेलवे स्टेशन - यह कोलकाता में नहीं है, लेकिन इससे जुड़े हावड़ा शहर में है, जो हुगली नदी के दूसरे किनारे पर है। यहाँ से चलने वाले स्टीमरबोट ₹5 रुपये में नदी के दूसरी ओर कोलकाता शहर ले जाते हैं जिसके बाद आप आराम से कोई भी टैक्सी, बस या रिक्शा ले सकते हैं। कोलकाता के यातायात को देखते हुए, यह आपका समय तो बचाता ही है और साथ में पैसे भी बचा लेता है।

बस द्वारा[सम्पादन]

खाना[सम्पादन]

पाव भाजी

कोलकाता में पाव भाजी बहुत प्रसिद्ध है, इसे पावु भाजी बोला जाता है। आपको ₹20 रुपये में घी में सब्जी और डबल रोटी को तल कर दिया जाता है। सड़कों पर कई लोग अंडे और चिकन भी बेचते रहते हैं। यह सभी सामान्यतः ताजे ही होते हैं और खाने हेतु सुरक्षित होते हैं। यहाँ मुगली पराठा भी मिलता है, जिसमें पहले कीमा डाला जाता था। बाद में इसके स्थान पर इससे सस्ता और मजेदार खाने के सामान का उपयोग किया जाता है। यहाँ पानी पूरी को पुचका बोलते हैं, यह दिल्ली में मिलने वाले पानी पूरी से बहुत हद तक अलग होता है। यह आपको सड़कों पर कहीं भी मिल सकता है। इसमें इमली पानी का उपयोग किया जाता है। यह स्थानीय लोगों या बाहरी लोगों के पीने लायक होता है और जब तक आप बहुत ज्यादा पानी नहीं पीते, तब तक यह आपको कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा। यदि आप कुछ घुंट पानी पीना चाहते हैं तो कोई बात नहीं, इतने से कोई विशेष हानि नहीं होगी।

कोलकाता में आपको बहुत सारे भारतीय चीनी भोजन खाने को मिल सकते हैं। आपको इस शहर में चारों ओर कहीं न कहीं चीनी भोजनालय मिल ही जाएगा। आप इनमें से किसी भी भोजनालय में जा कर भारतीय शैली में बनी कई व्यंजन खा सकते हैं। इसमें चिली चिकन काफी प्रसिद्ध है। इसके लिए सबसे अच्छा जगह चाइना टाउन है। यह जगह टंगरा के पास ही है। यहाँ आपको कई छोड़े बड़े और मध्यम आकार के भोजनालय मिल जाएँगे, जिसमें आप चीनी भोजन का सकते हैं। इसके साथ ही यहाँ थाई और इतालवी भोजन भी मिलता है।

पीना[सम्पादन]

सोना[सम्पादन]

कोलकाता एक पुराना महानगर है और यहाँ रात गुजारने के लिए औसत दर्जे से लेकर उच्च कोटि के विश्रामालय मौजूद हैं। सदर बाजार इलाके में कई मध्यम दर्जे के होटल हैं जो उपनिवेशी युग के सितारे हैं हालाँकि अब इनकी हालत खस्ता होती जा रही है। यह इलाका शहर के बीचोबीच है और आने-जाने के साधनों की बेहतरीन उपलब्धता है। इसके अलावा यहाँ के दोनों प्रमुख रेलवे स्टेशनों, हावड़ा और सियालदह के आसपास काफी सारे होटल मौजूद हैं जहाँ रात्रि विश्राम किया जा सकता है। दक्षिणी कोलकाता में गैरीहाट इलाके में भी सोने के लिए बढ़िया होटल मिल जायेंगे।

नए जमाने के होटल यहाँ के कुछ अस्पतालों के आस पास विकसित हुए हैं और पूरबी कोलकाता में आईटी सेक्टर के विकास के कारण यहाँ भी होटलों का एक संकुल विकसित हुआ है।

कई पाँच सितारा और चार सितारा होटल भी शहर में उपलब्ध हैं जो बड़े बजट की दरकार रखते हैं।

ब्रिटिश काल के कुछ क्लब, जैसे टालीगंज क्लब (बोस मार्ग), सैटरडे क्लब (थियेटर रोड) और बंगाल क्लब (रसेल स्ट्रीट) में आपको ऐशोआराम लायक जगह किराए पे मिल सकती है, दिक्कत यह है कि ये क्लब केवल सदस्यों द्वारा बुकिंग स्वीकार करते हैं।

यहाँ से जाएँ[सम्पादन]

सुंदरबन
  • विष्णुपुर - टेराकोटा के मंदिरों और मिट्टी की कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है; यहाँ की रेशमी साड़ियाँ भी मशहूर हैं।
  • शान्तिनिकेतन - आश्रम के रूप में स्थापित स्कूल और विश्वविद्यालय। इसकी स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा की गयी थी। यह क़स्बा हाथ की कारीगरी से बने चमड़े के सामानों और कंथा नामक कढ़ाई की साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है।
  • उत्तरी बंगाल - पहाड़ी इलाका है जहाँ कई मनोरम जगहें, जैसे कि दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी इत्यादि मौजूद हैं। निचले मैदानी इलाकों में, जो कोलकाता से जाने पर पहाड़ों के पहले पड़ते हैं, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे ऐतिहासिक शहर स्थित हैं।
  • सुंदरबन राष्ट्रीय पार्क - कोलकाता से दक्षिण में, समुद्र के किनारे दुनिया का सबसे बड़ा मैन्ग्रोव वनों का क्षेत्र है। प्रसिद्ध रॉयल बंगाल टाइगर (भारतीय शेर) का प्राकृतिक आवास भी है। यहाँ फेरी अथवा नाव द्वारा घूमा जा सकता है।
  • बीच - पश्चिम बंगाल राज्य के दक्षिणी इलाके में कई सुंदर समुद्री बीच भी हैं जैसे, दीघा, शंकरपुर, जूनपुट और मोंदारमोनी (मंदारमणि)। कोलकाता से कार किराए पर लेकर यहाँ जाया जा सकता है; बस सेवायें भी उपलब्ध हैं।