मथुरा

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मथुरा उत्तरप्रदेश प्रान्त का एक जिला है। मथुरा एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। लंबे समय से मथुरा प्राचीन भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का केंद्र रहा है। भारतीय धर्म,दर्शन कला एवं साहित्य के निर्माण तथा विकास में मथुरा का महत्त्वपूर्ण योगदान सदा से रहा है। आज भी महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानंद के गुरु स्वामी विरजानंद, कवि रसखान आदि महान आत्माओं से इस नगरी का नाम जुड़ा हुआ है। मथुरा को श्रीकृष्ण जन्म भूमि के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे पहुँचें[सम्पादन]

सड़क मार्ग[सम्पादन]

मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर दिल्ली और आगरा के बीच स्थित है। दिल्ली से लगभग 150 किमी दक्षिण में और आगरा से लगभग 50 किमी उत्तर में। मथुरा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, राज्य की राजधानी लखनऊ और सभी प्रमुख शहरों से सड़क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। कई राज्य परिवहन विभाग की बसें मथुरा से होकर चल रही हैं।

रेल मार्ग[सम्पादन]

मथुरा एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन है। मथुरा में दिल्ली और आगरा के बीच की अधिकतर ट्रेनें रुकती हैं।

वायु मार्ग[सम्पादन]

सबसे पास का हवाई अड्डा आगरा में स्थित है जो कि 50 किलोमीटर दूर है।

देखें[सम्पादन]

चूँकि मान्यता के अनुसार मथुरा हिन्दू देवता विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है इसलिए यहाँ भगवान कृष्ण के अनेकों मंदिर हैं, जिनके दर्शन के लिए यहाँ देश-विदेश से विभिन्न मौक़ों पर लाखों पर्यटक आते हैं। जबकि दो अवसरों,कृष्ण जन्माष्टमी (कृष्ण का जन्मदिन) व होली पर यहां सर्वाधिक भीड़ आती है।

कृष्ण जन्मभूमि मंदिर[सम्पादन]

सभी मंदिरों में प्रमुख है श्री कृष्ण जन्म भूमि मंदिर। कथाओं के अनुसार मथुरा के राजा कंस के समय ये उसका कारागार (जेल) था,जहाँ पर कंस ने अपनी बहिन देवकी और बहिन के पति वसुदेव को बंदी बनाकर रखा। जिनके आठों संतानों का जन्म यहीं हुआ,और कृष्ण उनके आठवें पुत्र थे। इस मंदिर में बने गर्भगृह को वह स्थान माना जाता है जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ।

श्री द्वारिकाधीश मंदिर[सम्पादन]

ये मथुरा नगरी का दूसरा प्रमुख मंदिर है। यहाँ राधाकृष्ण की सुंदर प्रतिमा और यहाँ की शंध्या कालीन आरती आकर्षण का केंद्र है।

यमुना घाट[सम्पादन]

चूंकि मथुरा शहर यमुना नदी के किनारे बसा है इसलिए यहाँ आने वाले पर्यटक विशेष अवसरों पर यमुना में स्नान करते रहे हैं। इसलिए यहां अनेक घाट हैं जहाँ शाम को होने वाली यमुना की आरती को देखने के लिए लोग जुटते हैं।

बांके बिहारी मंदिर[सम्पादन]

मथुरा शहर से 14 किमी दूर स्थित वृंदावन में ये मंदिर है। जहाँ स्थित भगवान कृष्ण की प्रतिमा अन्य प्रतिमाओं से अलग है।

इस्कान मंदिर[सम्पादन]

वृंदावन में स्थित इस मंदिर में विदेशी मूल के भक्त पूजारी की भूमिका में होते हैं अतः इसे अंग्रेजों का मंदिर भी कहा जाता है।

प्रेम मंदिर[सम्पादन]

ये भी वृंदावन में है। प्रख्यात धर्मगुरु कृपालु महाराज द्वारा बनवाया गया ये मंदिर अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इसका लाईट शो देखने योग्य है।

अन्य[सम्पादन]

निधिवन, रंगजी का मंदिर,गोविंद देव मंदिर व गीता मंदिर (बिड़ला मंदिर) आदि वृंदावन के प्रमुख मंदिर हैं। इनके अलावा मथुरा जिले के नंदगाँव,बरसाना व बलदेव के दाऊजी मंदिर का भी अपना विशेष महत्व है।