चंद्रताल

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चंद्रताल, या चंद्र ताल, हिमालय पर लगभग 4300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक झील है जिसकी प्राकृतिक सुंदरता का कोई सानी नहीं है। उत्तर भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में स्थित यह झील लाहौल-स्पीति जिले में लाहौल और स्पीति घाटियों की सीमा पर स्थित है और इस दोनों घाटियों को जोड़ने वाले कुंजम पास से कुछ दूरी पर स्थित है।

झील[सम्पादन]

इसके चंद्रमा जैसे आकार के कारण इसका यह नाम पड़ा। लाहुल-स्पीति जिले के लाहुल क्षेत्र में स्थित यह दुर्गम झील ट्रेकिंग व कैंपिंग जैसी रुचि वाले साहसी पर्यटकों में अति प्रसिद्ध है।

चन्द्रताल का व्यास लगभग 2.5 किलोमीटर है तथा झील के चारों ओर विशाल मैदान हैं, जो कि वसंत/गरमी के मौसम में कई प्रकार की वनस्पति व जंगली फूलों से भर जाता है। चरवाहे इसे चरागाहों के रूप में प्रयोग करते हैं और पर्यटक कैंप लगाने के लिए। झील के बीचोबीच एक टापू भी है, जिसे समुद्र टापू कहा जाता है।

आश्चर्य की बात यह भी है कि इस झील में पानी के आने का कोई स्रोत दिखाई नहीं पड़ता जबकि निकलने का रास्ता स्पष्ट है। इसका अर्थ यह लगाया जा सकता है कि पानी का स्रोत झील में धरती के नीचे से ही है।

चंद्र ताल से 30 किलोमीटर की दूरी पर सूरज ताल भी दर्शनीय है।

चेनाब का उद्गम[सम्पादन]

चंद्रताल से चंद्र नदी का उद्गम होता है और सूरज ताल से भागा नदी का। लाहौल स्पीति के जिला मुख्यालय केलांग से 7 किमी दूर, पत्तन घाटी के टाण्डी गांव के पास दोनों मिल कर चंद्रभागा नदी का रूप ले लेती हैं जो कि जम्मू-कश्मीर में जाकर चेनाब कहलाने लगती है।

आवागमन[सम्पादन]

चंद्रताल एक अति दुर्गम स्थान है। सर्दियों में तो यहाँ पहुंचा ही नहीं जा सकता। केवल मई के अंत से अक्टूबर प्रारंभ तक के समय में यह झील गम्य है।

निकटतम सुविधा संपन्न स्थान है मनाली, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग 21 पर स्थित हिमाचल का एक अतिप्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। मनाली से भी आगे रोहतांग पास से होते हुए 7-8 घंटे का सफर करके ही यहाँ पहुँचा जा सकता है। मनाली से चलने से पहले ईंधन, वाहन की मरम्मत आदि व खाने पीने के सामान का पूरा इंतज़ाम कर लेना चाहिए। रोहतांग पास के आगे लगभग लगभग बिलकुल ही निर्जन क्षेत्र है।

रोहतांग दर्रा पार करने के बाद पहला गाँव ग्राम्फू है जहाँ से एक रास्ता लद्दाख की ओर चला जाता है तथा दूसरा लाहौल स्पीति की ओर। चंद्रताल यहाँ से 50 किमी है। मुख्य सड़क छतड़ू, छोटा दड़ा, होते हुए बातल तक है। बातल में कुल दो इमारतें हैं जिनमें से एक है सरकारी विश्राम गृह और दूसरा है 40 साल पुराना चंद्रा ढाबा, जो अपने आप में एक विशिष्ट स्थान है। इस ढाबे को चला रहे दंपति पिछले 40 वर्षों में सैकड़ों पर्यटकों की जान बचा चुके हैं जिसके लिए उन्हें कई सम्मान भी दिए गए हैं। यदि कहा जाए कि चंद्रताल की गम्यता इस ढाबे की मौजूदगी के कारण ही संभव है तो गलत ना होगा क्योंकि इसके अतिरिक्त यहाँ पर दूर दूर तक कोई इनसानी बस्ती नहीं है, सुविधाओं का तो कहना ही क्या। इस इलाके में एक पेड़ तक नहीं है जैसा कि इस क्षेत्र के चित्रों में स्पष्ट देखा जा सकता है।

बातल से वाहन योग्य एक सड़क भी है, जिससे चंद्र ताल 14 किलोमीटर की दूरी पर पड़ती है, किंतु अगस्त से पहले इस सड़क की हालत प्रायः खराब ही होती है।

यहाँ पहुँचने का दूसरा रास्ता कुंजम पास से है जो केवल पैदल ही रास्ता है और वो लगभग 8 किलोमीटर है। चंडीगढ़ से शिमला, रामपुर बुशहर, किन्नौर के रास्ते स्पीति घाटी के नाको, किब्बर, काज़ा से होते हुए कुंजम पास या बातल आने के एक लंबे रास्ते का भी विकल्प है।

  • निकटतम हवाई अड्डा- भुन्तर (कुल्लू, हिमाचल प्रदेश)।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन - रोपड़ (रूपनगर), पंजाब -आगे सड़क मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग 21) से।